Thursday, 10 January 2013

Hanuman Chalisa in hindi


|| दोहा ||
श्रीगुरु चरण् सरोजरज, निजमनमुकुर सुधार ।
बरणौ रघुबर बिमल यश, जो दायक फलचार ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।
बल बुद्धिविद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥
|| चालीसा ||
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जै कपीस तिहुँलोक उजागर ॥  | 1 |
रामदूत अतुलित बलधामा । अंजनि-पुत्र पवन-सुत नामा ॥    | 2 |
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥    | 3 |
कंचन बरण बिराज सुबेशा । कानन कुंडल कुंचित केशा ॥    | 4 |
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥   | 5 |
शंकर-सुवन केशरी-नन्दन । तेज प्रताप महा जग-वंदन ॥   | 6 |
विद्यावान गुणी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥    | 7 |
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । रामलषण सीता मन बसिया ॥   | 8 |
सूक्ष्म रूपधरि सियहिं दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ॥   | 9 |
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥   | 10 |
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥   | 11 |
रघुपति कीन्ही बहुत बडाई । तुम मम प्रिय भरतहिसम भाई ॥   | 12 |
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥   | 13 |
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा । नारद शारद सहित अहीशा ॥   | 14 |
यम कुबेर दिगपाल जहाँते । कवि कोविद कहि सकैं कहाँते ॥   | 15 |
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥   | 16 |
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥   | 17 |
युग सहस्र योजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥   | 18 |
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँधि गये अचरजनाहीं ॥   | 19 |
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥   | 20 |
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिन पैसारे ॥   | 21 |
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥   | 22 |
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँकते काँपै ॥   | 23 |
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥   | 24 |
नाशौ रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥  | 25 |
संकट से हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥   | 26 |
सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ॥   | 27 |
और मनोरथ जो कोइ लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ | 28 |
चारों युग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥   | 29 |
साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥   | 30 |
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥   | 31 |
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥   | 32 |
तुम्हरे भजन रामको पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥   | 33 |
अन्त काल रघुपति पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥   | 34 |
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥   | 35 |
संकट हरै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बल बीरा ॥   | 36 |
जै जै जै हनुमान गोसाई । कृपा करहु गुरुदेव की नाई ॥   | 37 |
जोह शत बार पाठ कर जोई । छुटहि बन्दि महासुख होई ॥   | 38 |
जो यह पढै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥   | 39 |
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥     | 40 |
|| दोहा ||
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
रामलषन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप ॥

No comments:

Post a Comment