Saturday, 12 January 2013

Off-Page Optimization(SEO)




Off-page SEO is what can be done off the pages of a website to maximise its performance in the search engines for target keywords related to the on-page content. Offpage is the list of activities or techniques which helps in the optimization of a website to provide the maximum visibility to it in the search engines. Off Page Optimization is the work that is carry out outside of your website to improve your seo ranking and visibility for your customer.
Off Page Optimization is more focused on link building work and Social Media Marketing. Website should have more backlinks from various other quality website for seo ranking.
Off page optimization includes following techniques -
  • Social bookmarking
  • Directory submission
  • Article submission
  • Forum Posting
  • Blog commenting
  • Classified Ads Submission
  • Press Release Submission
  • Rss Feed Submission
  • Forum Signature


Off-Page SEO Checklist:
  • Always start with keyword research, testing and selection
  • Use Keywords in link anchor text
  • Obtain links from high ranking publisher sites
  • One-way inbound links (not link exchange or reciprocal links)
  • Different keywords in your link-ads from the same site
  • Gradual link building technology (no growth spikes)
  • Use relevant keywords near your inbound link (contextual relevance)
  • Deep linking (from multiple pages to multiple pages)
  • Target a large list of keywords (5-500+)
  • Link from sites with a variety of Link Ranks
  • Track all active keywords and refine strategy as required
  • Discontinue campaigns if ranking does not improve
  • Expect results in 1-2 months (Bing) 1-9 months (Google, Yahoo)
Avoid common off-page SEO mistakes:
  • Duplicate keywords in link avderts
  • Site-wide links causing link growth spikes
  • Using on-page SEOs to do the work of specialist off-page SEO’s
  • Placing random links without keywords near your link adverts
Do not use off-page SEO spamming tactics such as:
  • Link farms (sites with 100+ outbound links per page)
  • Using irrelevant keywords in your link-ads
  • Garbage links
  • Link churning
  • Hidden inbound links

Friday, 11 January 2013

Durga Ji Ki Aarti

श्री दुर्गा जी की आरती (Shri Durga Ji Ki Aarti)

जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी |
तुमको निशि दिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी ||

मांग सिंदूर विराजत, टीको मृगमद को |
उज्ज्वल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको ||

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै |
रक्तपुष्प गल माला, कंठन पार साजै ||

केहरि वाहन राजत, खडूग खप्पर धारी |
सुर - नर मुनिजन सेवत, तिनके दुखहारी ||

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती |
कोटिक चन्द्र दिवाकर, राजत सम ज्योति ||

शुम्भ निशुम्भ विदारे, महिषासुर घाती |
धूम्र विलोचन नैना, निशदिन मतमाती ||

चण्ड - मुण्ड संहारे, शौणित बीज हरे |
मधु - कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे ||

ब्रह्माणी, रुद्राणी, तुम कमला रानी |
आगम निगम बखानी, तुम शिव पटरानी ||

चौंसठ योगिनी गावत, नृत्य करत भैरु |
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरू ||

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता |
भक्तन की दुःख हरता, सुख सम्पत्ति करता ||

भुजा चार अति शोभित, वरमुद्रा धारी |
मनवांछित फल पावत, सेवत नर नारी ||

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती |
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति ||

अम्बे जी की आरती, जो कोई नर गावे |
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख - सम्पत्ति पावे ||


देवी वन्दना

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता  |  नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम: ||

10 Ways to Increase Your Site Crawl Rate


10 Ways to Increase Your Site Crawl Rate

  1. Update your content often and regularly
  2. Make sure your server works correctly: mind the uptime and Google Webmaster tools reports of the unreached pages. Two tools I can recommend here are Pingdom and Mon.itor.us.
  3. Mind your page load time: note that the crawl works on a budget – if it spends too much time crawling your huge images or PDFs, there will be no time left to visit your other pages.
  4. Check the site internal link structure: make sure there is no duplicate content returned via different URLs: again, the more time the crawler spends figuring your duplicate content, the fewer useful and unique pages it will manage to visit.
  5. Get more back links from regularly crawled sites.
  6. Adjust the crawl speed via Google Webmaster tools.
  7. Add a sitemap (though it’s up for a debate whether the sitemap can help with crawling and indexing issues, many webmasters report they have seen increased crawl rate after adding it).
  8. Make sure your server returns the correct header response.
  9. Make sure you have unique title and meta tags for each of your pages.
  10. Monitor Google crawl rate for your site and see what works and what not

Thursday, 10 January 2013

Saraswati Chalisa



श्री सरस्वती चालीसा


जनक जननि पद्मरज, निज मस्तक पर धरि।बन्दौं मातु सरस्वती, बुद्धि बल दे दातारि॥
पूर्ण जगत में व्याप्त तव, महिमा अमित अनंतु।दुष्जनों के पाप को, मातु तु ही अब हन्तु॥
जय श्री सकल बुद्धि बलरासी।जय सर्वज्ञ अमर अविनाशी॥
जय जय जय वीणाकर धारी।करती सदा सुहंस सवारी॥
रूप चतुर्भुज धारी माता।सकल विश्व अन्दर विख्याता॥
जग में पाप बुद्धि जब होती।तब ही धर्म की फीकी ज्योति॥
तब ही मातु का निज अवतारी।पाप हीन करती महतारी॥
वाल्मीकिजी थे हत्यारा।तव प्रसाद जानै संसारा॥
रामचरित जो रचे बनाई।आदि कवि की पदवी पाई॥
कालिदास जो भये विख्याता।तेरी कृपा दृष्टि से माता॥
तुलसी सूर आदि विद्वाना।भये और जो ज्ञानी नाना॥
तिन्ह न और रहेउ अवलम्बा।केव कृपा आपकी अम्बा॥
करहु कृपा सोइ मातु भवानी।दुखित दीन निज दासहि जानी॥
पुत्र करहिं अपराध बहूता।तेहि न धरई चित माता॥
राखु लाज जननि अब मेरी।विनय करउं भांति बहु तेरी॥
मैं अनाथ तेरी अवलंबा।कृपा करउ जय जय जगदंबा॥
मधुकैटभ जो अति बलवाना।बाहुयुद्ध विष्णु से ठाना॥
समर हजार पाँच में घोरा।फिर भी मुख उनसे नहीं मोरा॥
मातु सहाय कीन्ह तेहि काला।बुद्धि विपरीत भई खलहाला॥
तेहि ते मृत्यु भई खल केरी।पुरवहु मातु मनोरथ मेरी॥
चंड मुण्ड जो थे विख्याता।क्षण महु संहारे उन माता॥
रक्त बीज से समरथ पापी।सुरमुनि हदय धरा सब काँपी॥
काटेउ सिर जिमि कदली खम्बा।बारबार बिन वउं जगदंबा॥
जगप्रसिद्ध जो शुंभनिशुंभा।क्षण में बाँधे ताहि तू अम्बा॥
भरतमातु बुद्धि फेरेऊ जाई।रामचन्द्र बनवास कराई॥
एहिविधि रावण वध तू कीन्हा।सुर नरमुनि सबको सुख दीन्हा॥
को समरथ तव यश गुन गाना।निगम अनादि अनंत बखाना॥
विष्णु रुद्र जस कहिन मारी।जिनकी हो तुम रक्षाकारी॥
रक्त दन्तिका और शताक्षी।नाम अपार है दानव भक्षी॥
दुर्गम काज धरा पर कीन्हा।दुर्गा नाम सकल जग लीन्हा॥
दुर्ग आदि हरनी तू माता।कृपा करहु जब जब सुखदाता॥
नृप कोपित को मारन चाहे।कानन में घेरे मृग नाहे॥
सागर मध्य पोत के भंजे।अति तूफान नहिं कोऊ संगे॥
भूत प्रेत बाधा या दुःख में।हो दरिद्र अथवा संकट में॥
नाम जपे मंगल सब होई।संशय इसमें करई न कोई॥
पुत्रहीन जो आतुर भाई।सबै छांड़ि पूजें एहि भाई॥
करै पाठ नित यह चालीसा।होय पुत्र सुन्दर गुण ईशा॥
धूपादिक नैवेद्य चढ़ावै।संकट रहित अवश्य हो जावै॥
भक्ति मातु की करैं हमेशा।निकट न आवै ताहि कलेशा॥
बंदी पाठ करें सत बारा।बंदी पाश दूर हो सारा॥
रामसागर बाँधि हेतु भवानी।कीजै कृपा दास निज जानी॥
॥दोहा॥
मातु सूर्य कान्ति तव, अन्धकार मम रूप।डूबन से रक्षा करहु परूँ न मैं भव कूप॥
बलबुद्धि विद्या देहु मोहि, सुनहु सरस्वती मातु।राम सागर अधम को आश्रय तू ही देदातु॥

Hanuman Chalisa in hindi


|| दोहा ||
श्रीगुरु चरण् सरोजरज, निजमनमुकुर सुधार ।
बरणौ रघुबर बिमल यश, जो दायक फलचार ॥
बुद्धिहीन तनु जानिके, सुमिरौं पवन कुमार ।
बल बुद्धिविद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार ॥
|| चालीसा ||
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर । जै कपीस तिहुँलोक उजागर ॥  | 1 |
रामदूत अतुलित बलधामा । अंजनि-पुत्र पवन-सुत नामा ॥    | 2 |
महाबीर बिक्रम बजरंगी । कुमति निवार सुमति के संगी ॥    | 3 |
कंचन बरण बिराज सुबेशा । कानन कुंडल कुंचित केशा ॥    | 4 |
हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै । काँधे मूँज जनेऊ साजै ॥   | 5 |
शंकर-सुवन केशरी-नन्दन । तेज प्रताप महा जग-वंदन ॥   | 6 |
विद्यावान गुणी अति चातुर । राम काज करिबे को आतुर ॥    | 7 |
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । रामलषण सीता मन बसिया ॥   | 8 |
सूक्ष्म रूपधरि सियहिं दिखावा । विकट रूप धरि लंक जरावा ॥   | 9 |
भीम रूप धरि असुर सँहारे । रामचन्द्र के काज सँवारे ॥   | 10 |
लाय सजीवन लखन जियाये । श्री रघुबीर हरषि उर लाये ॥   | 11 |
रघुपति कीन्ही बहुत बडाई । तुम मम प्रिय भरतहिसम भाई ॥   | 12 |
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं । अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं ॥   | 13 |
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीशा । नारद शारद सहित अहीशा ॥   | 14 |
यम कुबेर दिगपाल जहाँते । कवि कोविद कहि सकैं कहाँते ॥   | 15 |
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा । राम मिलाय राजपद दीन्हा ॥   | 16 |
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना । लंकेश्वर भये सब जग जाना ॥   | 17 |
युग सहस्र योजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फल जानू ॥   | 18 |
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं । जलधि लाँधि गये अचरजनाहीं ॥   | 19 |
दुर्गम काज जगत के जेते । सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते ॥   | 20 |
राम दुआरे तुम रखवारे । होत न आज्ञा बिन पैसारे ॥   | 21 |
सब सुख लहै तुम्हारी सरना । तुम रक्षक काहू को डरना ॥   | 22 |
आपन तेज सम्हारो आपै । तीनों लोक हाँकते काँपै ॥   | 23 |
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । महाबीर जब नाम सुनावै ॥   | 24 |
नाशौ रोग हरै सब पीरा । जपत निरन्तर हनुमत बीरा ॥  | 25 |
संकट से हनुमान छुडावै । मन क्रम बचन ध्यान जो लावै ॥   | 26 |
सब पर राम तपस्वी राजा । तिनके काज सकल तुम साजा ॥   | 27 |
और मनोरथ जो कोइ लावै । सोइ अमित जीवन फल पावै ॥ | 28 |
चारों युग परताप तुम्हारा । है परसिद्ध जगत उजियारा ॥   | 29 |
साधु संत के तुम रखवारे । असुर निकंदन राम दुलारे ॥   | 30 |
अष्टसिद्धि नव निधि के दाता । अस बर दीन जानकी माता ॥   | 31 |
राम रसायन तुम्हरे पासा । सदा रहो रघुपति के दासा ॥   | 32 |
तुम्हरे भजन रामको पावै । जन्म जन्म के दुख बिसरावै ॥   | 33 |
अन्त काल रघुपति पुर जाई । जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई ॥   | 34 |
और देवता चित्त न धरई । हनुमत सेइ सर्व सुख करई ॥   | 35 |
संकट हरै मिटै सब पीरा । जो सुमिरै हनुमत बल बीरा ॥   | 36 |
जै जै जै हनुमान गोसाई । कृपा करहु गुरुदेव की नाई ॥   | 37 |
जोह शत बार पाठ कर जोई । छुटहि बन्दि महासुख होई ॥   | 38 |
जो यह पढै हनुमान चालीसा । होय सिद्धि साखी गौरीसा ॥   | 39 |
तुलसीदास सदा हरि चेरा । कीजै नाथ हृदय महँ डेरा ॥     | 40 |
|| दोहा ||
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रूप ।
रामलषन सीता सहित, हृदय बसहु सुरभूप ॥